कट्टा और जिंदा कारतूस के साथ हिस्ट्रीशीटर गिरफ्तार, पहले भी जा चुका है जेल
रायपुर ग्रामीण पुलिस ने अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को देशी कट्टा और जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी सरफराज खान पहले भी हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के मामले में जेल जा चुका है। पुलिस आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य राज्यों से जुड़े नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (क्राइम) संदीप मित्तल तथा एसडीओपी माना लम्बोदर पटेल के मार्गदर्शन में थाना सिलतरा पुलिस ने यह कार्रवाई की।
रात्रिकालीन पेट्रोलिंग में मिली सफलता
4-5 अगस्त की दरमियानी रात सिलतरा थाना पुलिस रात्रिकालीन पेट्रोलिंग पर थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम निमोरा के पंचायत भवन के सामने एक युवक देशी कट्टा लेकर लोगों में दहशत फैला रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी को पकड़ लिया।
कट्टा, जिंदा कारतूस और खाली खोखे बरामद
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम सरफराज खान बताया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक देशी कट्टा, एक जिंदा 8 एमएम कारतूस और चार खाली 8 एमएम कारतूस बरामद किए गए। आरोपी हथियार रखने का कोई वैध लाइसेंस या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
पुलिस ने हथियार और कारतूस जब्त कर थाना सिलतरा में अपराध क्रमांक 21/2026 के तहत आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पहले भी हत्या के प्रयास के मामले में जा चुका है जेल
जांच में सामने आया कि सरफराज खान वर्ष 2022 में थाना मंदिर हसौद क्षेत्र में दर्ज हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के मामले में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है। पुलिस के अनुसार आरोपी की आपराधिक गतिविधियों पर पहले से नजर थी।
यूपी से जुड़े आपराधिक रिकॉर्ड की भी होगी जांच
पुलिस के मुताबिक, सरफराज खान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया और प्रयागराज जिले का निवासी है। फिलहाल वह रायपुर जिले के ग्राम निमोरा में रह रहा था। आरोपी के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है।
इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उप निरीक्षक राजेंद्र सिंह कंवर, सहायक उप निरीक्षक कौशल मिर्झा, प्रधान आरक्षक कोमल वर्मा तथा आरक्षक अजय पटेल, प्रेम चनाब, भूपेंद्र टंडन और मुकेश जांगड़े की महत्वपूर्ण भूमिका रही।