ईमानदारी की सच्चाई
पायल साहू
एक अध्यापक थे वो स्कूल जाया करते थे छात्रों को पढ़ाने के लिए। जब वो अपने कक्षा में गए छात्रों को पढ़ाने के बाद वापस घर आए। जैसी ही अध्यापक ने अपने थैले में अपनी हिंदी की किताब बहुत ढूंढि पर हिंदी की किताब उन्हे नहीं मिली। फिर उन्होंने सोचा की मेरी हिंदी की किताब कहा चली गयी मिल ही नहीं रही हैं। एक दिन अध्यापक के कक्षा में ही अध्यापक के छात्र को उन्ही के कक्षा में हिंदी की किताब मिली। उस छात्र का नाम किशन था और वह बहुत होशियार लड़का था खेलकूद और पढ़ाई में हमेशा फर्स्ट आता था। जब किशन को अध्यापक के हिंदी का किताब मिला। फिर किशन मन मन बोला ये तो गुरु जी की हिंदी की किताब हैं। क्यों न मैं उनके घर जाकर ये हिंदी की किताब दे आऊँ। फिर किशन ने तुरंत अध्यापक के घर गया और किशन ने अध्यापक का दरवाजा खटखटाया फिर अध्यापक बोले की दरवाजा कौन खटखटा रहा हैं । मुझे लगता हैं कोई आया होगा। दरवाजा खोल के देखता हूँ बाहर कौन हैं। जैसे ही अध्यापक दरवाजा खोले तो बाहर किशन था। अध्यापक बोले किशन को अरे किशन तुम आओ न आओ अंदर आओ। कैसे किशन कैसे तुम अचानक ही मेरे घर आए। फिर किशन बोला गुरु जी अपने कक्षा में मुझे आपकी हिंदी की किताब मिली तो मैंने सोचा की ये किताब आप के घर जाकर दे देता हूँ। अध्यापक ने किशन से कहा की ये तुमने बहुत ही अच्छा काम किया किशन शाबाश। चाहे तो किशन अध्यापक की हिंदी की किताब रख सकता था पर किशन ऐसा नहीं किया।
सीख - कहानी से हमे ये सीख मिलती हैं कि हमे दूसरों की चीजों को ईमानदारी के साथ दूसरों की चीजों को लौटा देनी चाहिए और दुकान से हम कुछ खरीदारी करते हैं तो हमे तुरंत पैसे दुकानदार को ईमानदारी के साथ दे देना चाहिए उधार नहीं करना चाहिए।