6.78 करोड़ के नकली नोटों का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार, तीन फरार; पुलिस बनकर करते थे लूटपाट
हैदराबाद। तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस ने नकली नोटों के एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 6 करोड़ 78 लाख रुपये मूल्य के नकली नोट बरामद किए हैं। फ्यूचर सिटी कमिश्नरेट के अंतर्गत अब्दुल्लापुरमेट पुलिस और शादनगर स्पेशल ऑपरेशन टीम (SOT) की संयुक्त कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह के तीन अन्य सदस्य फरार हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 500 रुपये के नकली नोटों के अलावा प्रिंटर, स्कैनर, लैपटॉप, नोट काटने की मशीन, लैमिनेशन मशीन और अन्य उपकरण भी जब्त किए हैं।
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी नकली नोट छापने के साथ-साथ खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को ठगने और उनसे असली रुपये लूटने का काम भी करते थे। इसके लिए गिरोह के सदस्य फर्जी पुलिस पहचान पत्र, वॉकी-टॉकी और नकली पिस्तौल का इस्तेमाल करते थे।
रामोजी फिल्म सिटी के पास वाहन जांच में खुला राज
पुलिस के अनुसार, 1 नवंबर की रात रामोजी फिल्म सिटी के मुख्य प्रवेश द्वार के पास बालाजी ढाबा के समीप वाहन जांच की जा रही थी। इसी दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध मारुति डिजायर कार क्रमांक TS04 EY 7291 को रोककर तलाशी ली। कार की डिक्की में रखे एक ग्रे रंग के बैग से 500 रुपये के नकली नोटों की 16 गड्डियां बरामद हुईं। इनमें कुल 1600 नोट थे, जिनकी कीमत 8 लाख रुपये बताई गई। तलाशी के दौरान डमी पिस्तौल, दो वॉकी-टॉकी सेट और तीन संदिग्ध फर्जी पुलिस पहचान पत्र भी मिले। कार में सवार चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
किराए के मकान में बना रखा था नकली नोट छापने का केंद्र
पूछताछ में आरोपियों ने कुटलूर क्षेत्र में एक मकान किराए पर लेकर नकली नोट छापने का काम संचालित करने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने मकान में दबिश दी। तलाशी के दौरान वहां से 500 रुपये के नकली नोटों की 134 गड्डियां बरामद की गईं, जिनकी कुल कीमत लगभग 6 करोड़ 70 लाख रुपये थी। इस तरह कार और किराए के मकान से कुल 6 करोड़ 78 लाख रुपये मूल्य के नकली नोट बरामद किए गए। पुलिस ने मौके से कलर प्रिंटर, लेजर प्रिंटर, एप्सन प्रिंटर-कम-स्कैनर, लैपटॉप, लैमिनेशन मशीन, करेंसी काटने की मशीन तथा नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री जब्त की है।
यूट्यूब देखकर सीखी नकली नोट बनाने की तकनीक
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गिरोह के मुख्य सदस्यों ने असली 500 रुपये के नोटों को स्कैन कर उनकी तस्वीरें कंप्यूटर में तैयार कीं। इसके बाद फोटोशॉप सॉफ्टवेयर की मदद से उनमें बदलाव कर नकली नोट छापने की तकनीक विकसित की। बताया गया कि मुख्य आरोपी कर्णाकर ने यूट्यूब और सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो देखकर नकली नोट तैयार करने की प्रक्रिया सीखी थी। इसके बाद गिरोह ने प्रिंटर, स्कैनर और अन्य मशीनों की मदद से बड़ी मात्रा में नकली नोट तैयार करना शुरू कर दिया।
नकली पुलिस बनकर लोगों से लूटते थे असली रुपये
जांच में गिरोह के अपराध करने का एक और तरीका सामने आया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी नकली नोट खरीदने के इच्छुक लोगों को कम कीमत पर अधिक नकली करेंसी देने का लालच देते थे। इसके लिए वे 1:3 और 1:4 के अनुपात में नकली नोट देने का प्रस्ताव रखते थे। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए ग्राहकों को असली नोट दिखाए जाते थे। इसके बाद गिरोह के सदस्य फर्जी पुलिस पहचान पत्र, वॉकी-टॉकी और डमी पिस्तौल लेकर मौके पर पहुंचते थे। खुद को पुलिस अधिकारी बताकर ग्राहकों को धमकाते और उनके पास मौजूद असली रुपये लूटकर फरार हो जाते थे। पुलिस के मुताबिक, इस तरीके से गिरोह ने दो लोगों से क्रमशः 2 लाख और 3 लाख रुपये की ठगी एवं लूट की थी।