बिना लाइसेंस बाइक चलाकर ली थी जान, कोर्ट ने बेटे को 5 साल और पिता को दी 3 माह की जेल
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की सत्र अदालत ने सड़क हादसे में स्कूटर सवार की जान लेने के मामले में मोहित कुमार बघेल को पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। बिना ड्राइविंग लाइसेंस बेटे को बाइक सौंपने पर पिता मोहन लाल को भी तीन महीने की साधारण कैद हुई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हुई थी जबकि दूसरा गंभीर घायल हुआ था।
दुर्ग, एक नवंबर छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की एक अदालत ने सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के मामले में 19-वर्षीय एक युवक को पांच साल की जेल की सजा सुनाई है। वहीं, ड्राइविंग लाइसेंस के बगैर बेटे को मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति देने पर उसके पिता को भी तीन महीने की जेल की सजा सुनाई गई। सरकारी वकील द्रोण तम्रकार ने रविवार को बताया कि यहां की सत्र अदालत ने शनिवार को जामुल निवासी मोहित कुमार बघेल और उसके पिता मोहन लाल (54) को अगस्त 2025 में हुए सड़क हादसे के मामले में दोषी ठहराया।
इस हादसे में स्कूटर सवार एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया था। उन्होंने बताया कि हादसा चार अगस्त 2025 को रात करीब 8:30 बजे स्मृतिनगर पुलिस चौकी क्षेत्र के कोहका स्थित इंदु आईटी स्कूल के पास हुआ था। आरोप है कि मोहित लापरवाही से मोटरसाइकिल चला रहा था और उसने स्कूटर को टक्कर मार दी।
इस हादसे में स्कूटर चला रहे शादान अली की मौत हो गई, जबकि पीछे बैठे उत्तम पांडे गंभीर रूप से घायल हो गए। सरकारी वकील ने बताया कि पुलिस जांच में पता चला कि मोहित के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, इसके बावजूद उसके पिता ने उसे मोटरसाइकिल चलाने के लिए दे दी थी। मोहित को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105(2) (गैर-इरादतन हत्या) और मोटर वाहन अधिनियम की अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया।अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। मोहित के पिता मोहन लाल को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 5/180 के तहत दोषी ठहराया गया। अदालत ने उन्हें तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया।