RTI से खुला 2 अरब 18 करोड़ का शिक्षा विभाग का महाघोटाला...
* 2 अरब 18 करोड़ का हिसाब गायब, कैश बुक-वाउचर लापता , * तीन साल में कोषालय से निकली रकम, विभाग को नहीं पता कहां खर्च हुई * कार्यवाही के बजाय 2 हफ्ते में रिकार्ड दुरुस्त करने कह रहे जिला शिक्षाधिकारी * कांग्रेस कार्यकाल के चहेते तत्कालीन बीईओ संजय जायसवाल की भूमिका संदिग्ध * विकास पब्लिक स्कूल की मान्यता में भी फर्जी निरीक्षण प्रतिवेदन दे मान्यता दिलाये जाने के आरोपो से भी घिरे है संजय जायसवाल
कवर्धा शिक्षा विभाग में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आडिट टीम बना कर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का 5 सदस्यीय टीम से आडिट कराने पर एक ऐसा महाघोटाला सामने आया है, जिसने सरकारी वित्तीय व्यवस्था व बीईओ कार्यालय की पोल खोलकर रख दी है। अक्टूबर 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच 2 अरब 18 करोड़ 4 लाख 87 हजार 344 रुपये की राशि कोषालय से निकाली गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि विभाग के पास आज यह बताने के लिए कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं है कि यह पैसा आखिर गया कहां।
कैश बुक, बिल-वाउचर गायब है हिसाब किताब शून्य है
सूत्रों के मुताबिक, विभाग की कैश बुक, भुगतान वाउचर, बिल और उपयोगिता प्रमाण पत्र या तो गायब हैं या जानबूझकर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। कोषालय से राशि आहरित होने के बाद खर्च का कोई विश्वसनीय दस्तावेज मौजूद नहीं है। सवाल यह है कि बिना रिकॉर्ड के 2 अरब 18 करोड़ कैसे उड़ गए?
कबीरधाम जिला दबंग गृहमंत्री विजय शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के कारण हमेशा विपक्ष के निशाने पे रहता है ऐसे में आडिट रिपोर्ट के बावजूद रिकार्ड दुरुस्त करने का समय दिया जाना और निलंबन में विलंब जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध बना रहा है ।
आरटीआई से मिली जानकारीनुसार सारा मामला विकास खंड शिक्षा अधिकारी, कवर्धा कार्यालय से जुड़ा है। तत्कालीन बीईओ संजय जायसवाल की भूमिका को लेकर विभागीय गलियारों में गंभीर चर्चाएं हैं। सूत्र बताते हैं कि उनके कार्यकाल में कई और भी वित्तीय अनियमितताएं फर्जी तरीके से निजी स्कूल को मान्यता देने , अनुकंपा नियुक्ति , मेडिकल अवकाश भुगतान , एरियर्स भुगतान हुईं है , जिनकी फाइलें आज भी धूल खा रही हैं। जिला प्रशासन व जिला शिक्षा अधिकारी की नाक के नीचे इतनी बड़ी गड़बड़ी हो गई मतलब जिले के कार्यालयों की मॉनिटरिंग की कोई पुख्ता योजना अधिकारियों के पास नही है । मामला उजागर होने के बाद मामले को दबाने के प्रयास जोरो पर है ।
आरटीआई से मिली जानकारीनुसार जिला शिक्षा अधिकारी ने नवम्बर 2025 में विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का विभागीय लेखा परीक्षण 5 सदस्यीय जिला आडिट टीम के माध्यम से 24 नवम्बर 2025 व 25 नवम्बर 2025 को करवाया गया । जिला आडिट टीम ने अपने आडिट रिपोर्ट में बताया कि विकासखंड शिक्षाधिकारी कार्यालय द्वारा लेखा परीक्षण के दौरान क्रीड़ा निधि की कैश बुक प्रस्तुत नही की गई इसी तरह बिल रजिस्टर , कैश बुक , बीटीआर उपलब्ध नही होने पर ई कोष के आधार पर स्टेटमेंट निकाल गया जिसके अनुसार वर्ष अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 तक 27 करोड़ 76 लाख 1 हजार 786 रुपये , वर्ष अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक 67 करोड़ 29 लाख 22 हजार 645 रुपये , वर्ष अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 73 करोड़ 37 लाख 41 हजार 69 रुपये एवं वर्ष अप्रैल 2025 से अक्टूबर 2025 तक 49 करोड़ 62 लाख 1 हजार 844 रुपये इस तरह कुल 2 अरब 18 करोड़ 4 लाख 87 हजार 344 रुपये अक्टूबर 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच जिला कोषालय से आहरित हुए है किंतु कैश बुक संधारित्र नही होने के कारण उक्त राशि किंस खाते में अंतरित हुई है का कोई रिकॉर्ड नही पाया गया ।
विदित हो कि आडिट टीम की जांच प्रारंभ होने के बाद खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा भी अपने पत्र क्रमांक 1932(A) दिनांक 24 नवम्बर 2025 में आडिट टीम को लेख किया है कि जुलाई 2022 से इस कार्यालय में केश बुक संधारित्र नही है एवं बिल रजिस्टर भी अपूर्ण स्थिति में है । इसी तरह पत्र क्रमांक 1953 दिनांक 25 नवम्बर 2025 को जिला आडिट टीम को सम्बोधित पत्र में पुनः लेख किया गया है कि जुलाई 2022 से नियमित वेतन, रुके वेतन, वेतन वृद्धि, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, यात्रा भत्ता, अनाज अग्रिम, त्योहार अग्रिम, सीसी बिल, साभानि कटौती सम्बन्धी देयक व नोटशीट संधारित्र नही है ।
खंड शिक्षाधिकारी का पत्र विभाग में नियंम कयादो को ताक में रख कर मनमानी पूर्वक किये जा रहे काम की पोल खोल रहा है । मामले को लेकर कांग्रेस के चहेते रहे तात्कालीन बीईओ संजय जायसवाल की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है मामला विकास खंड शिक्षा अधिकारी, कवर्धा के कार्यकाल से जुड़ा बताया जा रहा है । 2 अरब 18 करोड़ के हिसाब की जानकारी नही मिलना और आवश्यक दस्तावेज , कैश बुक, बिल, वाउचर और अन्य वित्तीय अभिलेख गायब बताए जा रहे हैं। रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण पूरे लेन-देन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल में अन्य गड़बड़ियां भी हुई हैं, जिनकी अब तक समुचित जांच नहीं की गई।
इसके अलावा जिला प्रशासन की नाक के नीचे जिला मुख्यालय स्थित विकास पब्लिक स्कूल को कथित रूप से गलत निरीक्षण रिपोर्ट बना कर उसके आधार पर मान्यता दिलवाने और देने का मामला भी चर्चा में है। इस प्रकरण में जांच के बाद कार्रवाई के लिए फाइल पिछले कई महीनों से उच्च अधिकारियों के टेबल की शोभा बढ़ाते पास लंबित बताई जा रही है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। आरटीआई से जानकारी निकले जाने व शोसल मीडिया में ब्रेकिंग खबर चलने के बाद लापरवाह खंड शिक्षाधिकारी को दो हफ्ते के भीतर कमियों को पूरा करने का जिला शिक्षाधिकारी से प्राप्त जानकारीनुसार तत्कालीन बीएओ संजय जायसवाल को पत्र क्रमांक 425 दिनांक 19 जनवरी 2026 द्वारा दो हफ्ते के भीतर कमियों को पूरा कर कार्यालय को सूचित करने पत्र लिखा गया है।
जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय द्वारा कार्रवाई के बजाय रिकार्ड दुरुस्त करने का समय दिया जाना और नोटिस नोटिस खेलना समझ से परे है। अधिकारियों के संरक्षण की वजह से ठोस जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है न अब तक किसी को निलंबित किया गया है । मामले को दबाने की पुरजोर कोशिशे दिखाई दे रही है ।
प्रशासन की लापरवाही के चलते विपक्षियों को सरकार को घेरने का एक और मौका दे रहा है । स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, रिकॉर्ड की रिकवरीमामले की ईओडब्ल्यू स्तर की जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और दोषी अधिकारियों के खिलाफ निलंबन व आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग तेज हो गई है।
फिलहाल शिक्षा विभाग की चुप्पी और कार्रवाई में देरी इस बात की ओर इशारा कर रही है कि घोटाले की परतें जितनी खोदी जा रही हैं, कहानी उतनी ही गहरी होती जा रही है।
सवाल जो पूरे सिस्टम पर उठाये जा रहे हैं आखिर 218 करोड़ रुपये खर्च होने का प्रमाण कहां है? कैश बुक और वाउचर किसने गायब किए? आडिट जांच रिपोर्ट और RTI से खुलासे के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं? कार्यवाही की बजाय रिकार्ड दुरस्त करने क्यों कहा रहे जिला शिक्षाधिकारी ? क्या जिम्मेदारों को राजनीतिक या विभागीय संरक्षण प्राप्त है?
इस मामले में कबीरधाम जिला शिक्षाधिकारी एफ आर वर्मा का कहना है कि आडिट रिपोर्ट प्राप्त हुई है कुछ अनियामितताये है तत्कालीन खंड शिक्षाधिकारी संजय जायसवाल से स्पस्टीकरण मांगा गया है जवाब आने पर कार्यवाही की जाएगी। और कितनी रकम का हिसाब नही मिला है मैं फाइल देख कर ही बता पाऊंगा।
अब देखना यह है कि जैसे रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लगी आग ने सारे रिकॉर्ड नष्ट कर दिए, उसी प्रकार की आग कहीं कवर्धा खंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में न लग जाए...