कुलपति में हिम्मत है तो स्वयं के और चयनितों के बैंक खातों और मोबाइल नंबर के काल रिकॉर्ड की जांच कराए.... उमाशंकर शुक्ला
जगदलपुर - शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर में चल रहे भर्ती प्रक्रिया के बिच में कुलपति द्वारा मनमाने ढ़ंग से भर्ती प्रक्रिया के बिच में बिना उम्मीदवारो के नाम जारी किए गए पात्र अपात्र सूची से पूरे भर्ती प्रक्रिया पर लगातार बस्तर के जन प्रतिनिधि सवाल उठा रहे हैं परंतु भ्रष्टाचार में मस्त कुलपति को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है, विपरीत इसके कुलपति बस्तर के स्थानीय जन प्रतिनिधियों को ही खुलेआम बस्तर विरोधी कहते हुए बयान जारी कर रहा है।
कुलपति के मीडिया में छपे बयान को गंभीरता से लेते हुए बस्तर के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया और कुलपति मनोज कुमार श्रीवास्तव की गतिविधियां पिछली भर्ती से ही संदिग्ध रहा है। अबतक बस्तर के स्थानीय जनप्रतिनिधि पूर्व विधायक संतोष बाफना, पूर्व विधायक राजाराम तोडेम, पूर्व मंत्री अरविंद नेताम, कार्य परिषद सदस्य रहे पूर्व कुलपति श्री एस के पाण्डेय एवं स्वयं सहित कई लोगों ने तथ्यो के साथ लगातार इस मामले को उठाया है। यहां तक की सत्ता पक्ष के विधायक लता उसेंडी, अजय चंद्राकर और विपक्षी विधायक देवेन्द्र यादव ने भी शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय के भर्ती पर भ्रष्टाचार का मामला विधानसभा में उठाया था परंतु गूंगी बहरी सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगा।
सैकड़ों अभ्यर्थियों ने पिछले भर्ती के भ्रष्टाचार पर एकजुट होकर अनेक फोरमों में कुलपति के विरुद्ध नामजद सैकड़ों शिकायतें दर्ज किया था परंतु सैकड़ों शिकायतकर्ताओं में से सिंगल शिकायतकर्ता को बुलाकर आरोपो के संबंध में नहीं पूछा गया।
कुलपति जवाब दे
कुलपति कह रहा कि आरोप निराधार साबित हुआ तो कुलपति जांघ रिपोर्ट सार्वजनिक अब तक क्यों नहीं किए ?
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ऐसी क्या जरुरत पड़ गया कि भर्ती प्रक्रिया के बिच में बिना नाम उल्लेख किए नियम विरुद्ध पात्र अपात्र सूची क्यों जारी की गई ? जबकि यही कुलपति इसी विश्वविद्यालय के पिछले भर्ती में नाम सहित पात्र अपात्र सूची जारी किया गया था। एक ही विश्वविद्यालय में दो अलग-अलग मापदंड कैसे?
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कुलपति यह भी बताए की यूजीसी भर्ती नियम और रेगुलेशन में कहां पर लिखा है कि बिना उम्मीदवारो के नाम जारी किए मात्र एप्लिकेशन आइडी से पात्र अपात्र सूची जारी किया जाता है।
जबकि यूजीसी नियम साफ कहता है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होना चाहिए।
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छत्तीसगढ़ के किसी भी राजकीय विश्वविद्यालय में अभी तक ऐसी- बिना उम्मीदवारो के नाम जारी किए पात्र अपात्र सूची नहीं बनता है यदि किसी भी राजकीय विश्वविद्यालय ने ऐसा प्रक्रिया अपनाया हो तो कुलपति बताए।
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कुलपति यह भी बताए कि पिछले भर्ती में सैकड़ों योग्य उम्मीदवार (स्वर्ण पदक धारी, जेआरएफ, एसआरएफ, पीएचडी धारक) होने के बावजूद सैकड़ों योग्य उम्मीदवारों को क्यों नाट फाउंड सुटेबल किया गया।
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कुलपति यह भी बताए कि मेरिट सूची में प्रथम दस स्थान पर रहने वाले प्रतिभाशाली और उच्च योग्यता थारी उम्मीदवारो को छोड़कर मेरिट सूची के अंतिम पायदान के अपने चहेते उम्मीदवारो को साक्षात्कार में अधिक अंक देकर कैसे चयन किया गया।
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यदि कुलपति भ्रष्ट नहीं है तो साक्षात्कार की विडियो ग्राफी कयो नही कराए।
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वर्तमान में चल रहे भर्ती प्रक्रिया अंतर्गत सभी साक्षात्कार के विडियो ग्राफी कराई जाए।
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कुलपति जो कह रहा है कि सबूत दे तो इस्तीफा दे देंगे तो इसका जवाब यह है कि चोर विडियो शूटिंग करवाकर चोरी नहीं करता है जिसका विडियो रिकॉर्डिंग हो, चोरी तभी पकड़ में आता है जब तथ्यो की सही तरिके से जांघ की जाए। यदि कुलपति में हिम्मत है तो स्वयं के और जो चयनित हुए हैं उन सभी के पिछले एक वर्ष की काल रिकार्ड और बैक खातों की जांच कराए सबकुछ प्रमाण और सबूत खुद बखुद बाहर आ जाएगा और रहा सवाल इस्तीफा तो यह कुलपति को जरूरत नहीं पड़ेगी, सरकार में जरा भी नैतिकता है तो इस भ्रष्ट कुलपति के उपरोक्त तथ्यों के आधार पर न्यायिक जांघ कराए और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बस्तर विरोथी कहने वाले तानाशाह कुलपति को तत्काल बर्खास्त करें।
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आज तक सैकड़ों उम्मीदवारो ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल सहित अनेक फोरमों में नामजद शिकायत दर्ज की है परंतु आजतक किसी शिकायत कर्ता को जवाब तलब नहीं किया गया है, जांच समिति ने भी किसी शिकायतकर्ता को नहीं पूछा तो आरोप कैसे निराधार और निराकित हो जाएगा, यह भी एक गंभीर सवाल है।