चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा आदेश: बिना DCC-PCC सूचना नहीं होगा कोई धरना-प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने संगठनात्मक अनुशासन को मजबूत करने के लिए नया निर्देश जारी किया है। अब किसी भी धरना-प्रदर्शन, आंदोलन, जनसंपर्क अभियान या बड़े राजनीतिक कार्यक्रम से पहले संबंधित जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) को पूर्व सूचना देना तथा स्थानीय संगठन से समन्वय करना अनिवार्य होगा।
पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यह किसी प्रकार की अनुमति लेने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर बेहतर तालमेल और अनुशासन बनाए रखने की पहल है।
बिना समन्वय कार्यक्रमों पर लगी लगाम
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में कई नेताओं ने स्थानीय संगठन को विश्वास में लिए बिना अलग-अलग राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए थे। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर समेत कई जिलों से ऐसी शिकायतें प्रदेश नेतृत्व तक पहुंची थीं। कांग्रेस का मानना है कि बिना संगठनात्मक समन्वय के आयोजित कार्यक्रमों से कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होती है और गुटबाजी को बढ़ावा मिलता है। इसी वजह से अब हर बड़े कार्यक्रम की जानकारी पहले DCC और PCC को देना अनिवार्य कर दिया गया है।
टिकट दावेदारों में बढ़ी बेचैनी
नए दिशा-निर्देशों के बाद संभावित टिकट दावेदारों में भी हलचल तेज हो गई है। कई नेताओं का कहना है कि स्थानीय मुद्दों पर कई बार तत्काल विरोध-प्रदर्शन करना पड़ता है। ऐसे में पहले सूचना देने और समन्वय की प्रक्रिया पूरी करने से राजनीतिक प्रतिक्रिया देने में देरी हो सकती है।
कुछ दावेदारों को यह आशंका भी है कि यदि संगठनात्मक निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो भविष्य में टिकट वितरण के दौरान इसका असर पड़ सकता है।
गुटबाजी रोकने की कोशिश
कांग्रेस संगठन में लंबे समय से जिला कांग्रेस कमेटियों और विधायकों के बीच समन्वय की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों में, जहां पार्टी के मौजूदा विधायक हैं, वहां संभावित दावेदारों और विधायकों के बीच कार्यक्रमों को लेकर खींचतान की स्थिति कई बार देखने को मिली है।
पार्टी का कहना है कि नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य संगठन के भीतर अनुशासन बनाए रखना, गुटबाजी कम करना और चुनाव से पहले सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है। चुनावी तैयारियों के बीच कांग्रेस का यह कदम संगठनात्मक एकजुटता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।