दीपका माइन में ब्लास्टिंग के दौरान कर्मी की मौत, सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप

दीपका माइन में ब्लास्टिंग के दौरान कर्मी की मौत, सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप

कोरबा जिले में एसईसीएल की दीपका कोयला खदान में बुधवार दोपहर ब्लास्टिंग के दौरान एक कर्मी की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा सुआ-भोड़ी फेस पर उस समय हुआ, जब कथित तौर पर अमानक तरीके से ब्लास्टिंग कराई जा रही थी। घटना के बाद पूरे कोयला क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के अनुसार, ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। न तो पर्याप्त सेफ्टी ज़ोन बनाया गया और न ही कर्मियों को सुरक्षित दूरी पर हटाया गया। इसी लापरवाही की चपेट में आकर कर्मी की मौके पर ही मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ब्लास्टिंग जल्दबाजी में कराई जा रही थी और सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी थी। इस घटना के बाद खदान क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने दीपका खदान प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उत्पादन के दबाव में लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है और मजदूरों की जान जोखिम में डाली जा रही है।

स्थानीय लोगों ने भी खदान प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि दीपका खदान में “उत्पादन पहले, सुरक्षा बाद में” की नीति लंबे समय से चल रही है। यदि समय रहते अमानक ब्लास्टिंग पर रोक लगाई जाती और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती, तो इस हादसे को टाला जा सकता था।

हादसे के बाद अब तक खदान प्रबंधन की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। न ही जिम्मेदारी तय करने को लेकर कोई स्पष्ट पहल की गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह मामला भी पूर्व की घटनाओं की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा, या फिर इस बार किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई होगी।

फिलहाल, सभी की नजरें कोल इंडिया और एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दीपका खदान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।