पंखुड़ियां लघुकथा साझा संकलन का आभासी विमोचन

पंखुड़ियां लघुकथा साझा संकलन का आभासी विमोचन

मंजुला जी के जन्मदिवस के अवसर पर नीलकमल पंखुड़ियां लघुकथा साझा संकलन का आभासी विमोचन दिवंगत मंजुला जी के निज निवास में संपादक श्रीमती किरण वैद्य, सह संपादक डॉ मीता अग्रवाल मधुर श्रीमती श्वेता हर्ष श्रीवास्तव के द्वारा सम्पन्न हुआ ।इस अवसर पर मंजुला की यादें उपस्थित साहित्यकार कीआँखे नम कर गई। डॉ मीता मधुर ने 
"शब्दों की ज्योति बुझी नहीं है,
वह हर रचना में ढलती है।
सृजनशील आत्माएँ कभी नहीं जातीं,
वे स्मृतियों में सदा पलती हैं।
शीलु लूनिया ने - 
और आज यादों का बगीचा फिर महक उठा है।
कहीं सितार की मधुर धुन सुनाई देती है,
आपने प्रेम को भी जीकर दिखाया।
और आपका यह बगीचा…
जहाँ पेड़ आपसे बातें करते थे।
शायद आज भी कोई फूल खिलता होगा,
तो उसमें आपकी मुस्कान छिपी होगी,
कोई पत्ती हिलती होगी,
तो उसमें आपकी आवाज़ सुनाई देती होगी।
 श्री गोपाल सोलंकी ने 
यादों के झरोखे से निकल 
कुछ कतरे आँसू पलकों पर ठहर जाएंगे।
सुनाकर भाव विभोर कर दिया।
इस अवसर पर श्रीमती चंद्रकला त्रिपाठी लतिका भावे, वृंदा पंचभाई, नीलिमा मिश्रा,शीलू लूनिया, मीना शर्मा, सुनीता विनय वर्मा, विजया ठाकुर, भारती यादव मेधा , श्वेता सक्सेना ने अपने स्मृति को साझा कर भाव विभोर कर दिया।इस अवसर  पर  साहित्य प्रेमी एवं परिजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन किया श्वेता श्रीवास्तव ने। संचालन किया पूजा श्रीवास्तव ने।