बड़ा सवाल: बस्तर यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक भर्ती में पारदर्शिता के बजाय गोपनीयता क्यों? बिना नाम के जारी की पात्र-अपात्र सूची

बड़ा सवाल: बस्तर यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक भर्ती में पारदर्शिता के बजाय गोपनीयता क्यों? बिना नाम के जारी की पात्र-अपात्र सूची

 ​जगदलपुर। शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर विश्वविद्यालय) एक बार फिर शैक्षणिक पदों की भर्ती को लेकर विवादों और संदेह के घेरे में है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मार्च 2026 में विज्ञापित विभिन्न विभागों के प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए पात्र-अपात्र आवेदकों की सूची जारी की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में आवेदकों के नाम गायब हैं और गोपनीयता बरतते हुए केवल 'एप्लिकेशन आईडी' (Application ID) दर्शाई गई है।

​विश्वविद्यालय के इस कदम से आवेदकों में भारी आक्रोश है और प्रथम दृष्टया ही भर्ती प्रक्रिया में घालमेल और गड़बड़ी करने की मंशा उजागर हो रही है।

​ इन विषयों की सूची से नाम गायब 

​यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वेबसाइट पर कॉमर्स, फिजिक्स, गणित,जूलॉजी, केमिस्ट्री, बॉटनी, सोशियोलॉजी, स्टैटिस्टिक्स (सांख्यिकी), जियोलॉजी और इकोनॉमिक्स विषयों की जो सूची अपलोड की है, उसमें उम्मीदवारों के नाम छुपाए गए हैं। आवेदकों का कहना है कि राज्य के किसी भी राजकीय विश्वविद्यालय में आज तक ऐसी कोई परंपरा नहीं रही है, जहाँ नाम के बिना सूची जारी की गई हो।

​ गड़बड़ी छुपाने के लिए अपनाया 'नया हथकंडा' 

​आवेदकों का आरोप है कि पिछले साल की भर्ती में हुई गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार से बचने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह नया रास्ता निकाला है। दरअसल, साल 2024-25 की भर्ती में पात्र-अपात्र सूची देखकर ही उम्मीदवारों ने गड़बड़ी का अनुमान लगा लिया था। तब कुछ चुनिंदा नामों के अवैधानिक चयन की लिखित शिकायत पहले ही कर दी गई थी, जो चयन सूची आने पर 100% सच साबित हुई।

​इस बार पीड़ित उम्मीदवार एकजुट न हो सकें और भर्ती में अपनाए जा रहे मापदंडों की तुलना न कर पाएं, इसीलिए नामों को पूरी तरह गोपनीय रख दिया गया है। बिना नाम की सूची के कारण आवेदक यह जान ही नहीं पाएंगे कि किस मापदंड के तहत किसे पात्र या अपात्र किया गया है, जिससे 'दावा-आपत्ति' करने का अधिकार भी बेमानी हो गया है।

​ पिछली भर्ती में लगे थे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, विधानसभा में भी गूंजा था मामला 

​उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024-25 की शैक्षणिक भर्ती में बस्तर यूनिवर्सिटी पर भारी भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लगे थे। यह मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी गूंजा था। इस मामले को विधानसभा में सत्ता पक्ष के विधायक श्री अजय चंद्राकर और विपक्षी विधायक श्री देवेन्द्र यादव ने उठाया था।
तब योग्य उम्मीदवारों को 'नॉट फाउंड सूटेबल' (Not Found Suitable) घोषित करने, मेरिट में सबसे पीछे रहे आवेदकों का चयन करने, रोस्टर में हेरफेर, विज्ञापित और स्वीकृत पदों में अंतर तथा दिव्यांग उम्मीदवारों की उपेक्षा जैसे गंभीर आरोप तथ्यों के साथ लगाए गए थे। इस संबंध में यूजीसी (UGC), महिला आयोग, एससी-एसटी आयोग, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायतें की गई थीं, जिन पर आज तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

​ पारदर्शिता की मांग: साक्षात्कार की हो वीडियोग्राफी 

​बेरोजगार और योग्य उम्मीदवारों ने मांग की है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन की नियत साफ है और वह निष्पक्ष भर्ती चाहता है, तो गोपनीयता छोड़ पारदर्शिता अपनाए।

 ​आवेदकों के नाम और उनकी शैक्षणिक योग्यता (Scoring) सहित नई संशोधित सूची तुरंत जारी की जाए। 

​भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आने वाले सभी साक्षात्कारों (Interviews) की अनिवार्य रूप से पूरी वीडियोग्राफी कराई जाए।
​अगर यूनिवर्सिटी प्रशासन इन मांगों को पूरा नहीं करता, तो साफ है कि इस बार की भर्ती भी पूरी तरह संदेह और कानूनी विवादों के घेरे में रहेगी।

 विधायक लता उसेंडी ने भी मामले को आज विधानसभा में उठाया 
समाचार सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में कोंडागांव विधायक एवं कार्य परिषद सदस्य लता उसेंडी ने भी शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय के भर्ती में हो रहे गड़बड़ी और शिकायतें का मामला विधानसभा प्रश्नकाल में उठाया है।