डॉक्टर जीतेंद्र सिंगरौल नियुक्त किए गए डायरेक्टर, छत्तीसगढ राज्य सोशल ऑडिट इकाई

डॉक्टर जीतेंद्र सिंगरौल नियुक्त किए गए डायरेक्टर, छत्तीसगढ राज्य सोशल ऑडिट इकाई

भारत सरकार के ग्रामीण एवं पंचायत मंत्रालय द्वारा संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना एवं प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के कार्यों की जमीनी स्तर पर पारदर्शी एवं परिणामूलक क्रियान्वयन के लिए सोशल ऑडिट कराने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ शासन ने ग्राम मोछ विकासखंड-तखतपुर, जिला बिलासपुर निवासी डॉक्टर जीतेंद्र कुमार सिंगरौल को छत्तीसगढ़ राज्य सोशल ऑडिट यूनिट के डायरेक्टर नियुक्त किए है। छत्तीसगढ़ शासन ग्रामीण एवं पंचायत विभाग द्वारा दिनांक 28 अगस्त 2025 को जारी आदेश के अनुक्रम में डॉ. सिंगरौल ने दिनांक 29 अगस्त 2025 को अपना कार्यभार ग्रहण कर लिए है।

आपको बताते चलें कि डॉक्टर जीतेंद्र सिंगरौल को जमीन स्तर से लेकर के प्रशासनिक स्तर के साथ ही साथ राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय क्षेत्रों का लगभग 22 वर्षों का लंबा अनुभव है और वे पहले इस पद में बैठने वाले छत्तीसगढ़िया व्यक्ति होंगे। डॉ सिंगरौल को ग्रामीण युवाओं, मितानिन कार्यक्रम, सोशल आडिट क्रियान्वयन के तकनीकी पहलूओं के जानकार, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग के साथ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निर्वहन कर चुके हैं। ज्ञातव्य हो कि इसके पूर्व अक्टूबर 2013 में  प्रथम संचालक के रूप में आंध्रप्रदेश निवासी डॉक्टर लीलावती को संचालक बनाए गए थे। उसके बाद महाराष्ट्र, उडीसा, मध्यप्रदेश इत्यादि राज्यों के लोग इस पद पर सेवाएं दे चुके है। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में बैठने वाले डॉ सिंगरौल पहले व्यक्ति है जो गांव से निकल करके राज्य स्तर के इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को क्रियान्वन कराएंगे। उन्हें छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक, भौगोलिक एवं राजनैतिक परिस्थितियों का जमीनी स्तर का तर्जुबा है। डॉ सिंगरौल राज्य के अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जिनको राष्ट्रीय युवा पुरस्कार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार प्राप्त होने का गौरव प्राप्त है। आप 2011 में जापान के टोकियो में सूचना प्रौद्योगिकी नीति के विशेषज्ञ के रूप में एवं 2012 में चीन देश के बीजिंग, इनर मंगोलिया व शेगयांन जैसे देशों में भारत सरकार की ओर से प्रतिनिधित्व कर चुके है। आपको समाज सेवा और युवा गतिविधियों का लंबा अनुभव है। 

डॉ सिंगरौल के नियुक्ति से ऐसा कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य सरकार द्वारा पारदर्शिता एवं सुशासन युक्त कार्यों की बेहतर क्रियान्वयन की दिशा में एक सशक्त और महत्वपूर्ण कदम होगा। अब आने वाले समय बताएगा कि गांव-गांव में व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर कर जनता के बीच पारदर्शी एवं विश्वास कायम करने में कितना अंकुश लगेगा।