NH-130C पर रात्री आवागमन प्रतिबंध से बढ़ी चिंता, सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार की मांग

NH-130C पर रात्री आवागमन प्रतिबंध से बढ़ी चिंता, सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार की मांग

सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के सीमावर्ती जिलों में रहने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। वन्यजीव संरक्षण के उद्देश्य से टाइगर प्रोजेक्ट के कोर एरिया में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक सभी प्रकार के आवागमन पर रोक लगा दी गई है। इस दौरान केवल एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को ही आवागमन की अनुमति दी जाएगी।

इस आदेश की जद में राष्ट्रीय राजमार्ग 130-सी (NH-130C) भी आ गया है, जो रायपुर, गरियाबंद और उड़ीसा को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है। इस हाईवे से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री वाहन, मालवाहक ट्रक और निजी वाहन गुजरते हैं। ऐसे में रात के समय मार्ग बंद होने से आम नागरिकों, व्यापारियों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

देवभोग से उड़ीसा को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग प्रभावित
गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र से होते हुए उड़ीसा के लगभग 10 जिलों को जोड़ने वाला NH-130C उदंती–सीतानदी टाइगर प्रोजेक्ट के कोर एरिया से होकर गुजरता है। आदेश के अनुपालन में तौरंगा से इंदागांव तक लगाए गए बैरियरों को रात के समय बंद करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में असमंजस और चिंता का माहौल है।

50 से अधिक ग्रामीण मार्गों पर भी लगेगी रोक
केवल राष्ट्रीय राजमार्ग ही नहीं, बल्कि गरियाबंद और धमतरी जिले के टाइगर प्रोजेक्ट कोर एरिया में आने वाले 50 से अधिक छोटे ग्रामीण मार्गों पर भी रात्री आवागमन बंद रहेगा। गरियाबंद जिले में तौरंगा, जुगाड़, जांगड़ा, बम्हनीझोला, इंदागांव और गरिबा बैरियर शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक बंद रहेंगे। इसी तरह धमतरी जिले में भी दर्जनों बैरियर बंद किए जाएंगे।

ग्रामीणों की मांग: नेशनल हाईवे को मिले राहत
इस फैसले से देवभोग सहित आसपास के इलाकों में रहने वाले ग्रामीण खासे चिंतित हैं। उनका कहना है कि इस मार्ग का कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं है, जिससे रात में आवागमन पूरी तरह ठप हो जाएगा। ग्रामीणों की मांग है कि कम से कम नेशनल हाईवे 130-सी को इस प्रतिबंध से राहत दी जाए।

अधिवक्ता प्रशांत मानिकपुरी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वमान्य है, लेकिन चूंकि यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण और एकमात्र संपर्क मार्ग है, इसलिए लोगों की कठिनाइयों को देखते हुए उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अगले निर्णय पर टिकी हैं।